Prof. Shamim Hanfi

प्रो. शमीम हनफ़ी

پروفیسر شمیم حنفی
प्रो. शमीम हनफ़ी
Modern Era

प्रसिद्ध भारतीय उर्दू आलोचक, नाटककार और साहित्यिक इतिहासकार। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व प्रोफेसर एमेरिटस।

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Ghazals by प्रो. शमीम हनफ़ी

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غزل • Ghazal خاموشی کے درمیان

ख़ामोशी के दरमियान

ख़ामोशी के दरमियान इक गुफ़्तगू ऐसी भी थी हर तरफ़ तारीकियां थीं रोशनी ऐसी भी थी लफ़्ज़ चुप थे और मान...
غزل • Ghazal روشنی کی تلاش

रोशनी की तलाश

रोशनी की तलाश में जो सफ़र शुरू हुआ हर मोड़ पर इक नया आईना रूबरू हुआ ज़िंदगी की धूप में जब साये ढल ग...

Nazms by प्रो. शमीम हनफ़ी

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نظم • Nazm دلی کی شام

दिल्ली की शाम

दिल्ली की शाम में जब हवा बोलती है पुरानी हवेलियों का दुख खोलती है जामिया की फ़िज़ाओं में तीरगी के प...
نظم • Nazm وقت کا سفر

वक़्त का सफ़र

वक़्त की रेत पर नक़्श उभरते हैं और ढल जाते हैं कितने फ़नकार यहां आते हैं और छल जाते हैं सिर्फ़ अल्फ...

Famous Couplets (اشعار • लोकप्रिय अशआर)

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#Quest
सफ़र تمام ہوا پھر بھی جستجو نہ بجھی
چلا تھا ڈھونڈنے جس کو وہ روبرو نہ ہوا
پروفیسر شمیم حنفی प्रो. शमीम हनफ़ी Prof. Shamim Hanfi
#Humanity
दिलों की बात समझने की आगही दे दे
ख़ुदा करे कि मुझे शुऊर-ए-आदमी दे दे
پروفیسر شمیم حنفی प्रो. शमीम हनफ़ी Prof. Shamim Hanfi
#Philosophy
ये आईना जो सच्चाई बयां करता है
ज़माना इसके मुक़ाबलि खड़ा नज़र आया
پروفیسر شمیم حنفی प्रो. शमीम हनफ़ी Prof. Shamim Hanfi
#Literature
हर एक लफ़्ज़ के पर्दे में एक दास्तां है
ख़ामोश रहते हुए भी सुख़न नवां है
پروفیسر شمیم حنفی प्रो. शमीम हनफ़ी Prof. Shamim Hanfi

Rubaiyat (رباعیات) by प्रो. शमीम हनफ़ी

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رباعی • Rubai

ख़याल-ए-दोस्त

हर सुबह नया इक पैग़ाम लाती है हर शाम दिलों को आराम लाती है ख़ामोश निगाहों में बसा है जो दर्द वो याद हर एक रोज़ बनाम लाती है

رباعی • Rubai

सहर का पैग़ाम

ज़ुल्मत में भी उम्मीद की किरन बाक़ी है दिल में अभी एहसास-ए-वतन बाक़ी है उलझे हैं अगरचे ख़ार राहों में मगर दमके हुए फूलों का चमन बाक़ी है

Qita (قطعات) by प्रो. शमीम हनफ़ी

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قطعہ • Qita

फ़िक्र-ओ-आगही

फ़िक्र की शमा जलाए हुए हम गुज़रे हैं ज़ुल्मत-ए-शब को मिटाए हुए हम गुज़रे हैं हर नए मोड़ पे तारीख़ ने पहचाना है आदमियत को बचाए हुए हम गुज़रे हैं

قطعہ • Qita

अदब का रंग

अदब की रूह में सच्चाई का नूर होता है जहां भी जाए दिलों को सुरूर होता है जो लफ़्ज़ दिल से निकलता है असर रखता है वो चाहे शब हो कि सेहर बदस्तूर होता है

English Poetry by प्रो. शमीम हनफ़ी

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انگریزی شاعری • English Poetry

ख़ामोशी की गूंज

ख़ामोशी के दरमियान इक पुरसुकून गुफ़्तगू ने पर तोले जब तारीकी ने ज़मीन को घेरा, तब भी इक ख़ुफ़िया रोशनी थी अल्फ़ाज़ ने ख़ामोशी अख़्तियार की, लेकिन मानी रात भर बोलते रहे मेरी अपनी ही रूह के साथ, इक अनोखा गीत गूंज उठा